News India24 uk

No.1 News Portal of India

उत्तराखंड: ट्रांसफर के 2 हफ्ते बाद भी ‘कुर्सी’ पर डटे रहे साहब, देहरादून के इस अफसर का दोहरी रेंज से नहीं छूट रहा मोह

देहरादून: उत्तराखंड वन विभाग में प्रशासनिक आदेशों को ठेंगे पर रखने का एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है। सरकार और विभाग के कड़े रुख के बावजूद एक वन रेंज क्षेत्र अधिकारी (Forest Range Officer) तबादला आदेश जारी होने के दो सप्ताह बाद भी अपनी कुर्सी छोड़ने को तैयार नहीं हैं। विभागीय गलियारों में इस अधिकारी के ‘कुर्सी प्रेम’ को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं।

30 जून को आया था ट्रांसफर ऑर्डर सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, बीते 30 जून 2026 को वन विभाग में एक स्थानांतरण आदेश जारी किया गया था। इस सरकारी आदेश के तहत देहरादून वन प्रभाग (Dehradun Forest Division) में तैनात एक वन रेंज क्षेत्र अधिकारी का तबादला हरिद्वार वन प्रभाग(Haridwar Forest Division) के लिए कर दिया गया था।नियमों के अनुसार, ऐसे आदेश जारी होने के तत्काल बाद अधिकारी को पुराने पद का चार्ज छोड़कर नए स्टेशन पर जॉइनिंग देनी होती है। हालांकि, इस मामले में आदेश आए हुए दो हफ्ते से ज्यादा का समय बीत चुका है,लेकिन साहब टस से मस होने को तैयार नहीं हैं।

एक साथ दो मलाईदार रेंज का प्रभार, यही है मोह की वजह?

विभागीय सूत्रों का दावा है कि इस हठधर्मिता के पीछे का कारण बेहद दिलचस्प है। स्थानांतरण से पहले उक्त अधिकारी देहरादून वन प्रभाग में एक नहीं, बल्कि दो-दो वन रेंज आशारोडी और मलहान क्षेत्र के वन रेंज अधिकारी के पद पर तैनात थे। एक साथ दो महत्वपूर्ण रेंजों का कार्यभार संभाल रहे इन अधिकारी का अपनी इस दोहरी कुर्सी से ऐसा मोह जागा है कि वह ट्रांसफर के बाद भी देहरादून छोड़ने को राजी नहीं दिख रहे हैं।

प्रशासनिक हल्के में खड़े हो रहे कई गंभीर सवाल

इस पूरे मामले ने वन विभाग की कार्यप्रणाली और अनुशासन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं:

• क्या देहरादून वन प्रभाग के आला अधिकारियों को इस मनमानी की भनक नहीं है?

• अगर जानकारी है, तो दो हफ्ते बीत जाने के बाद भी अधिकारी को जबरन कार्यमुक्त (Relieve) क्यों नहीं किया गया?

• क्या इस अधिकारी को विभाग के ही किसी रसूखदार अधिकारी या सफेदपोश का वरदहस्त प्राप्त है?

इस मामले में अब देखना यह होगा कि वन विभाग के उच्च अधिकारी इस बेलगाम अफसरशाही पर क्या एक्शन लेते हैं और कब तक इन साहब को हरिद्वार वन प्रभाग के लिए रवाना किया जाता है।

error: Content is protected !!