News India24 uk

No.1 News Portal of India

क्लोजर की आड़ में बैराज के अंदर जमकर हो रहा अवैध खनन, मिलीभगत के चलते हो रहा बड़ा खेल

विकासनगर-डाकपत्थर बैराज पर पावर कैनाल की मेंटेनेंस के चलते 10 दिन के क्लोजर की अनुमति ली गई है।खनन माफिया इसकी आड़ में अपने ट्रैक्टर ट्राली और जेसीबी नुमा मशीन से बैराज के अंदर घुसकर जमकर दिन-रात राज्य की खनिज संपदा लूट रहे हैं यूजीवीएनएल विभाग तहसील प्रशासन पुलिस प्रशासन वन विभाग सब के सब हुए लाचार।

आपको बता दें कि यूजीवीएनएल विभाग द्वारा जानकारी दी गई की विभाग को मेंटेनेंस कार्य करने के लिए 10 दिन का क्लोजर मिला है जो की बेहद ही कम समय है जिसके चलते तीन गुना तेजी से कार्य करना पड़ रहा है विभाग द्वारा डाकपत्थर बैराज पर पोकलैंड मशीन और डंपर उतारे गए हैं जिसका फायदा उठाकर खनन माफियाओं ने डाकपत्थर बैराज पर अपने दर्जनों ट्रैक्टर ट्राली और जेसीबी नुमा मशीने उतार दी है और लगातार दिन रात अवैध खनन किया जा रहा है जिसकी विभाग ने एसडीएम विकासनगर, डाकपत्थर पुलिस चौकी प्रभारी और विभाग की सुरक्षा अधिकारी को लिखित शिकायत और कयी वीडियो रिकॉर्डिंग भी दी गई है और यह भी बताया कि मार्च महीने से लगातार विभाग द्वारा शिकायते की जा रही है लेकिन कोई कार्यवाही नहीं की जा रही है। यूजीवीएनएल के अधिशासी अभियंता ने यह भी बताया कि जब से क्लोजर लिया गया है तब से अवैध खनन 10 गुना बढ़ गया है यदि विभाग के कर्मचारी कुछ कहते हैं तो उनको खनन माफियाओं के द्वारा डरा धमका दिया जाता है। खनन माफियाओं के हौसले इतने बुलंद है कि दो राज्यों की सीमा को जोड़ने वाले 1950 के दशक में बने पुल के पिलर के नीचे से ही खुदाई कर अपने ट्रैक्टर ट्राली में खनिज सामग्री भरकर ले जाते हैं जिससे पुल कभी भी क्षतिग्रस्त या धराशाई हो सकता है पुल के ऊपर से जब सुरक्षाकर्मी मना करते हैं तो उनके ऊपर नीचे से ही पत्थर फ़ेंके जाते हैं।

अब यहां सवाल यह उठता है कि आखिर खनन माफियाओं को किस सफेद पोश का संरक्षण प्राप्त है जो प्रतिबंधित क्षेत्र में खनन माफियाओं के ट्रैक्टर ट्राली और जेसीबी नुमा मशीनें यहां तक कि क्लोजर गेट के नीचे से बैराज के अंदर घुसकर दिन-रात अवैध खनन कर रहे हैं और संबंधित विभाग अवैध खनन को रोकने में नाकाम है या दूसरे शब्दों में यूं समझा जाए कि राष्ट्रीय धरोहर को नुकसान पहुंचता है तो पहुंचने दो,परियोजनाएं ठप होती हों तो होने दो, राज्य की खनिज संपदा फ्री में लुटती हो तो लुटने दो, सबको अपना-अपना हिस्सा मिल रहा है इसलिए शायद कोई भी विभाग कार्यवाही नहीं करना चाहता ।

error: Content is protected !!