विकासनगर (न्यूज़ इंडिया 24 यूके)। क्षेत्र में अवैध खनन और परिवहन पर लगाम कसने के लिए खनन विभाग लगातार ई-रवन्ना प्रणाली और डिजिटल निगरानी व्यवस्था को मजबूत करने का दावा कर रहा है। इसके बावजूद, स्थानीय स्तर पर कुछ स्टोन क्रशरों के कामकाज को लेकर सामने आ रही गंभीर शिकायतें पूरी प्रशासनिक व्यवस्था पर सवालिया निशान खड़े कर रही हैं।
रवन्ने की आड़ में ओवरलोडिंग का खेल
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, कुछ क्रेशर प्लांट जिन पर आरोप लगाए गए जैसे श्रीश्याम क्रेशर, साईं क्रेशर, न्यू यमुना क्रेशरआरोपों के मुताबिक खेल बेहद शातिराना तरीके से अंजाम दिया जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक श्री श्याम, यमुना स्टोन क्रशर, पहले संबंधित वाहन में नियमों के तहत निर्धारित मात्रा में उपखनिज (रेत-बजरी) भरा जाता है और उसका आधिकारिक ई-रवन्ना ऑनलाइन जनरेट कर दिया जाता है। लेकिन गाड़ी के क्रेशर परिसर से बाहर निकलने से ठीक पहले उसमें कथित तौर पर 5 से 10 टन तक अतिरिक्त माल ऊपर से लाद दिया जाता है। यदि इन दावों में सच्चाई है तो सरकारी रवन्ने में दर्ज स्वीकृत वजन और वाहन में मौजूद वास्तविक वजन के बीच एक बड़ा अंतर देखने को मिलेगा, जो सीधे तौर पर राजस्व चोरी और ओवरलोडिंग को बढ़ावा दे रहा है।
बिना नंबर वाले वाहनों को सामग्री देने पर उठे सवाल
मामले में दूसरा बड़ा गंभीर पहलू बिना नंबर अथवा अस्पष्ट पंजीकरण पहचान वाले वाहनों का क्रशरों से खननसामग्री लेकर बेखौफ दौड़ना है। सवाल उठ रहे हैं कि आखिर किस नियम के तहत क्रेशर संचालक इन अज्ञात वाहनों को खनन सामग्री की आपूर्ति कर रहे हैं? आधिकारिक रिकॉर्ड या गेट पास एंट्री में इन वाहनों की पहचान को किस प्रकार दर्ज किया जा रहा है? स्थानीय लोगों की मांग है कि जांच के दौरान यदि नियमों का उल्लंघन पाया जाता है, तो सिर्फ वाहन मालिकों पर ही नहीं, बल्कि सामग्री देने वाले संबंधित क्रशर की भी बराबर की जवाबदेही तय की जानी चाहिए।
जबकि प्रावधान के मुताबिक ऐसे वाहन में लदा उपखनिज जिस स्टोन क्रशर/स्क्रीनिंग प्लांट/रिटेल भंडारणकर्ता/अनुज्ञाधारक से लाया गया होगा, उसके विरुद्ध जिला खान अधिकारी द्वारा ₹5,00,000 का अर्थदंड अधिरोपित कर वसूल किए जाने का प्रावधान है।
औचक निरीक्षण और कड़े मिलान की आवश्यकता
इस पूरे खेल का पर्दाफाश करने के लिए अब भूतत्व एवं खनिकर्म निदेशालय, उत्तराखंड की स्थानीय टीमों को मुस्तैद होना पड़ेगा। जानकारों का कहना है कि खनन विभाग को क्षेत्र के क्रशरों पर औचक छापेमारी करनी चाहिए। इस दौरान क्रशर के सीसीटीवी (CCTV) फुटेज, धर्मकांटा पर्ची, स्टॉक रिकॉर्ड, ई-रवन्ना डेटा और मौके पर खड़े वाहनों के वास्तविक वजन का गहनता से मिलान (क्रॉस-वेरिफिकेशन) किया जाना बेहद जरूरी है। तभी डिजिटल निगरानी के इस दौर में हो रही इस कथित धांधली की वास्तविक स्थिति साफ हो सकेगी।अब देखना यह है कि प्रशासन और विभाग इन गंभीर शिकायतों का संज्ञान लेकर नियम तोड़ने वाले क्रशरों व वाहनों पर कब तक और क्या कड़ी कार्रवाई अमल में लाता है।
जब नियम इतने स्पष्ट और सख्त हैं, तो खनन क्षेत्रों तथा क्रशर जोन में बिना नंबर अथवा अस्पष्ट नंबर वाले खनिज वाहनों की शिकायत सामने आने पर विभागीय निगरानी पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
(नोट: इस खबर में उल्लिखित अतिरिक्त माल लोड करने और बिना नंबर वाले वाहनों के संचालन से जुड़ी बातें स्थानीय शिकायतों और आरोपों पर आधारित हैं। इसकी आधिकारिक पुष्टि सक्षम विभाग की विस्तृत जांच और अभिलेखों के मिलान के बाद ही संभव होगी।)

