देहरादून गढ़वाल रेंज आईजी राजीव स्वरूप पिछले लंबे समय से अपनी सख्त कार्यशैली, अनुशासन और अपराध नियंत्रण को लेकर सुर्खियों में रहे हैं। उनके नेतृत्व में दून पुलिस प्रदेश सरकार की ज़ीरो टॉलरेंस नीति को जमीन पर उतारते हुए अपराधमुक्त उत्तराखंड के लक्ष्य की दिशा में लगातार काम करती नजर आई है।
लेकिन अचानक सामने आए कथित रोमियो लेन बार विवाद ने राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में हलचल पैदा कर दी। कुछ लोगों ने सीधे आईजी गढ़वाल रेंज राजीव स्वरूप को निशाने पर लेना शुरू कर दिया और उनकी छवि को धूमिल करने की कोशिशें तेज होती दिखाई दीं। सवाल उठने लगे कि क्या यह महज एक तथाकथित विवाद था, या फिर किसी बड़े षड्यंत्र की कोई पटकथा ?
एसपी सिटी के बयान ने बदला पूरा घटनाक्रम:-
पूरा दिन और पूरी रात चले आरोप-प्रत्यारोपों के बीच जब पुलिस के एक अधिकारी ने आगे आकर इस मामले में अपना एक बयान वीडियो के माध्यम से जारी किया तो इस पूरे प्रकरण कि सारी दिशा और दशा ही बदल गई।
इस मामले में एसपी सिटी प्रमोद कुमार की ओर से साफ साफ कहा गया कि संबंधित बार में उनका किसी भी आईजी अधिकारी से कोई भी आमना-सामना नहीं हुआ। इस बयान के सामने आने के बाद कई सवाल स्वतः खड़े हो गए। यदि आमना-सामना हुआ ही नहीं, तो फिर आईजी गढ़वाल रेंज का नाम इस कथित विवाद में कैसे और क्यों घसीटा गया ?
क्या समय रहते फेल हो गया षड्यंत्र ?
एसपी सिटी के इस बयान के सामने आने के बाद प्रथम दृष्टया तो ऐसा ही प्रतीत हो रहा है कि मानो शायद यह मामला किसी सुनियोजित छवि-हनन अभियान से जुड़ा हुआ जैसा नजर आ रहा है, जोकि समय रहते फिलहाल धराशायी होता दिखाई प्रतीत हो रहा है। राजनीतिक, सामाजिक और प्रशासनिक हलकों में चर्चा है कि एक ईमानदार और सख्त अधिकारी की साख पर चोट करने की कोशिश की गई, लेकिन एक पुलिस अधिकारी के इस बयान के सामने आने के बाद ये पूरा तथाकथित षड्यंत्रकारी खेल अब धराशाई होता नजर आ रहा है।
आईजी गढ़वाल राजीव स्वरूप को करीब से जानने वाले लोग उन्हें जिंदादिल, संवेदनशील, मददगार और बेहद ईमानदार अधिकारी बताते हैं। कहा जाता है कि वे 24 घंटे आमजन के सुख-दुख में खड़े रहने वाले अधिकारी हैं। उनकी पहचान एक ऐसे अफसर की है, जो अनुशासन के साथ मानवीय संवेदनाओं को भी बराबर महत्व देते हैं। यही वजह है कि गढ़वाल ही नहीं, पूरे उत्तराखंड में उनकी मजबूत और साफ-सुथरी छवि है।
आईजी गढ़वाल उत्तराखंड पुलिस के तेज-तर्रार और चर्चित अधिकारियों में गिने जाते हैं। वर्तमान में वे गढ़वाल रेंज आईजी के पद पर तैनात हैं। पदभार संभालने के बाद उन्होंने महिला सुरक्षा, कानून व्यवस्था और अपराध नियंत्रण के मोर्चे पर प्रभावी कार्य किया है।
उनकी सख्ती का अंदाजा इसी बात से लगाया जाता है कि अपराधियों में कानून का भय स्थापित करने में उन्होंने उल्लेखनीय भूमिका निभाई है। अनुशासन, कर्तव्यनिष्ठा, बेदाग छवि और ईमानदारी के कारण वे आमजन के बीच अलग पहचान रखते हैं।
बड़ा सवाल अभी भी बाकी है…
अब सबसे बड़ा सवाल यही है—यदि आरोप तथ्यहीन थे, तो आईजी गढ़वाल रेंज की छवि खराब करने की कोशिश किसने और क्यों की?
इन सवालों के जवाब भले अभी बाकी हों, लेकिन इतना तय है कि एक पुलिस अधिकारी के इस मामले से संबंधित बयान सामने आते ही इस कथित विवाद की पटकथा कमजोर पड़ती दिखाई दे रही है।

