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यमुना नदी में जमकर हो रहा अवैध खनन,खनन पट्टे और क्रेशर प्लांट खेल रहे रवन्नो की जगह टोकन टोकन

राजधानी देहरादून के विकासनगर तहसील क्षेत्र अंतर्गत यमुना नदी में मिली भगत के चलते हो रहा जमकर अवैध खनन। एक खनन पट्टे की आड़ में पूरी यमुना नदी में नौघाट भीमावाला क्षेत्र से लेकर ढकरानी क्षेत्र से लगती पूरी यमुना नदी में किया जा रहा मशीनों से अवैध,खनन रवन्ने काटने के बजाय दिए जा रहे टोकन जिस पर ना खरीदने वाले का GST नंबर है और न बेचने वाले का GST नंबर मतलब सीधा-सीधा टैक्स चोरी।उक्त खनन पट्टे से खनन सामग्री लेकर जाने वाले वाहनों का किसी प्रकार का कोई तोल नहीं किया जा रहा है ना ही तोल कांटे पर सीसीटीवी कैमरा चालू है आखिर कौन से वह विभागीय अधिकारी जांच करने आए थे जिन्होंने तोल कांटे का निरीक्षण किया और सीसीटीवी कैमरो को जांच ही नहीं कि वह सुचारू रूप से काम कर रहे हैं या नहीं ऐसी कौन सी जल्दी खनन पट्टे का पोर्टल खोलने की उन विभागीय अधिकारी को थी।

आपको बता दे की यमुना नदी में ढालीपुर से लेकर नौघाट भीमावाला तक तीन खनन पट्टे आवंटित हैं जिसमें तीनों खनन पट्टा संचालकों ने ढकरानी क्षेत्र से लगते एक खनन पट्टे का पोर्टल खनन विभाग से खुलवाया है जिसकी आड़ में मानकों की अनदेखी करते हुए दो खनन पट्टों से खनन कार्य किया जा रहा है। यहां बताते चलें कि नौघाट भीमावाला और ढकरानी के दो खनन पट्टों से जेसीबी नुमा सैकड़ो टमटम मशीनों से खनन कार्य किया जा रहा है जिसमें पट्टा स्वामी के द्वारा 450 पन्नों की एक टोकन बुक बनाई है जिसकी कीमत 4.5 लाख रुपए रखी है। क्रेशर संचालक एक टोकन बुक के 4.5 लाख रुपए नगद देकर पट्टा स्वामी से खरीद लेते हैं जिसमें क्रेशर मलिक ट्रैक्टरों से 450 चक्कर अपने क्रेशर प्लांट पर खनन सामग्री मंगवाते हैं अब ट्रैक्टर मालिक को भी प्रति क्विंटल के हिसाब से चक्कर के पैसे मिलते हैं जिसके चलते यमुना नदी में लगी टमटम मशीनों से ट्रैक्टर मालिक 15 से 20 टन खनन सामग्री अपने ट्रैक्टर में लोड कर क्रेशर प्लांट पर डालता है जिसमें कुछ ट्रैक्टरों को 5 से 6 टन का रवन्ना काटकर दे दिया जाता है जिस पर वह ट्रैक्टर पूरा दिन सुबह 6:00 से लेकर शाम के 6:00 तक यमुना नदी से क्रेशर प्लांट पर खनन सामग्री परिवहन करता रहता है।

अब यहां यदि एक क्रेशर मालिक एक टोकन बुक खत्म करता है तो इसका मतलब है कि 450 चक्कर उक्त प्लांट पर खनन सामग्री पहुंची है 20 टन के हिसाब से लगभग 9000 टन जिसके लिए बाद में क्रेशर मालिक अपनी एडजस्टमेंट के हिसाब से पट्टा संचालक से रॉयल्टी खरीदता है। आपसी सहमति के चलते रोजाना 5 क्रेशर प्लांटों को ही यमुना नदी से खनन सामग्री ढोने की इजाजत होती है। अब यहां से अंदाजा लगाया जा सकता है कि यदि एक क्रेशर प्लांट 450 टोकन पर 450 चक्कर खनन सामग्री डलवाता है तो इसका मतलब रोजाना 2250 चक्कर मतलब 45000 टन यमुना नदी से खनन सामग्री निकाली है। क्या जितनी खनन सामग्री लाई जा रही है उतनी रॉयल्टी खनन पट्टे से कट रही है या नहीं इसके लिए प्रत्येक क्रेशर प्लांट के सुबह 6:00 बजे से शाम 6:00 बजे तक तोल कांटे की प्रत्येक ट्रैक्टर के तोल के साथ CCTV फुटेज की जांच कर ली जाए और प्रत्येक ट्रैक्टर की रॉयल्टी कितनी कटी है इसकी जांच कर ली जाए तो दूध का दूध पानी का पानी हो जाए। क्या यमुना नदी में टमटम मशीनों से खनन कार्य करना वैध है या अवैध, यदि अवैध है तो यमुना नदी में टमटम मशीनों से खनन किसकी शेह पर किया जा रहा है और यदि वैध है तो ऐसा कौन सा आदेश कब पारित हुआ इसको भी सार्वजनिक किया जाए। लेकिन जब रक्षक ही भक्षक बन जाए तो यह सब जांच करेगा कौन?

रोजाना सरकार को करोड़ों रुपए के राजस्व की चपत लगाई जा रही है इससे किसी को कोई सरोकार नहीं बताया जा रहा है इस सब के पीछे एक बड़ा सिंडिकेट काम कर रहा है जिसके चलते किसी भी विभागीय अधिकारी व कर्मचारियों की इतनी हिम्मत नहीं है कि इस काले कारोबार में कोई सख्त कार्रवाई कर सके यदि अवैध खनन के खिलाफ आवाज उठती है या मीडिया में खबरें छपती है तो संबंधित विभाग इक्का-दुक्का ट्रैक्टर ट्रॉली का चालान कर इस तरह दर्शाता है कि मानों आवैध खनन के खिलाफ बहुत बड़ी कार्यवाही विभाग के द्वारा कर दी गई हो।

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