देहरादून। उत्तराखंड की राजधानी देहरादून से भू-माफियाओं के दुस्साहस का एक ऐसा सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसने प्रशासनिक व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। यहाँ आर्यन और सोनू थापा नाम के जालसाजों ने एक आम नागरिक को झांसे में लेकर सीधे राज्य सरकार की सरकारी ज़मीन की रजिस्ट्री कर डाली और उससे 42 लाख 60 हज़ार रुपये ऐंठ लिए।

जब पीड़ित को इस धोखाधड़ी का पता चला और उसने अपने पैसे वापस माँगे, तो सोनू थापा और आर्यन नामक आरोपियों ने उसे जान से मारने की धमकी दे डाली। इतना ही नहीं, आरोपियों ने खुलेआम सिस्टम को चुनौती देते हुए कहा कि मुख्यमंत्री (CM), जिलाधिकारी (DM) या एसडीएम (SDM) भी उनका कुछ नहीं बिगाड़ सकते। पीड़ित ने अब उत्तराखंड के पुलिस महानिदेशक (DGP Uttarakhand) से न्याय और सुरक्षा की गुहार लगाई है।
क्या है पूरा मामला?

शिकायत पत्र के अनुसार, पीड़ित प्रदीप सिंह भंडारी (पुत्र स्वर्गीय भरत सिंह भंडारी), जो कि देहरादून के प्रेमनगर क्षेत्र के कोटड़ा संतौर के निवासी हैं, उन्होंने डीजीपी को लिखित शिकायत भेजी है। प्रदीप भंडारी का आरोप है कि सोनू थापा (निवासी चन्दनबाड़ी, देहरादून) और आर्यन (निवासी ईस्टहोप टाउन, देहरादून) नाम के दो व्यक्तियों ने उन्हें विकासनगर तहसील के अंतर्गत ईस्टहोप टाउन में शिमला रोड मार्ग के पास एक ज़मीन दिखाई।
₹42.60 लाख में हुआ सौदा, Google Pay और चेक से हुआ भुगतान
आरोपियों ने खाता संख्या 1007 और खसरा संख्या 933 ग में स्थित करीब 403 गज ज़मीन का सौदा प्रदीप भंडारी से तय किया। पीड़ित ने आरोपियों पर भरोसा करके कुल 42,60,000 रुपये का भुगतान कर दिया।

• इसमें से 28,000,000 रुपये (28 लाख) का भुगतान चेक और गूगल पे (Google Pay) के माध्यम से ऑनलाइन किया गया था।
• बाकी की रकम कैश (नकद) दी गई थी।इसके बाद बाकायदा 6 नवंबर 2024 को प्रदीप सिंह भंडारी की पत्नी के नाम पर इस ज़मीन की रजिस्ट्री भी करवा दी गई।
पटवारी के पास पहुँचे पीड़ित, तो उड़ गए होश
धोखाधड़ी का खुलासा तब हुआ जब पीड़ित 15 दिसंबर 2025 को अपनी ज़मीन पर पहुँचे। उन्होंने देखा कि आसपास के प्लॉट की बाउंड्री टूटी हुई थी। स्थानीय लोगों से पूछताछ करने पर पता चला कि तहसील प्रशासन की जेसीबी (JCB) मशीन ने यहाँ आकर अवैध निर्माण को ध्वस्त कर दिया है।

जब पीड़ित इस मामले की जानकारी लेने तहसील और संबंधित पटवारी के पास पहुँचे, तो उनके पैरों तले ज़मीन खिसक गई। पटवारी ने उन्हें साफ बताया कि जिस ज़मीन की रजिस्ट्री आरोपियों ने उनके नाम की है, वह उत्तराखंड राज्य सरकार की संपत्ति है और वहाँ चल रही प्लॉटिंग पूरी तरह से अवैध है।
‘CM, DM या SDM भी हमारा कुछ नहीं बिगाड़ सकते’
पीड़ित प्रदीप भंडारी का आरोप है कि जब उन्होंने अपनी गाढ़ी कमाई के पैसे वापस माँगे, तो सोनू थापा और आर्यन अपनी औकात पर उतर आए। आरोपियों ने उनके साथ जमकर गाली-गलौज की और जान से मारने की धमकी दी।

पीड़ित के मुताबिक, आरोपियों ने रौब झाड़ते हुए कहा— “जो करना है कर लो, हमारा कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता। चाहे सीएम हो, डीएम हो या एसडीएम हो… कोई हमारा कुछ नहीं कर सकता।”DGP से लगाई सख्त कार्रवाई की गुहारसरकारी ज़मीन के नाम पर लाखों की ठगी और भू-माफियाओं के इस खुले चैलेंज के बाद पीड़ित परिवार बेहद डरा हुआ है। पीड़ित ने महानिदेशक (DGP) को सौंपे पत्र में कहा है कि इन भू-माफियाओं पर सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए और उन्हें इंसाफ दिलाया जाए। पीड़ित ने यह भी लिखा है कि यदि उनके या उनके परिवार के साथ कोई अनहोनी होती है, तो उसके ज़िम्मेदार यही लोग होंगे।
इस मामले में पुलिस के पास शिकायत दर्ज करा दी गई है और पत्र पर पुलिस विभाग की आधिकारिक मोहर भी लगी है। अब देखना यह है कि मुख्यमंत्री और प्रशासनिक अधिकारियों को सरेआम चुनौती देने वाले इन बेखौफ भू-माफियाओं पर उत्तराखंड पुलिस क्या एक्शन लेती है।

