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आसन वेटलैंड क्षेत्र की परिधि में खनन भंडारण, सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की धज्जियां उड़ाते हुए मानकों की अनदेखी कर भंडारण को दी अनुमति

विकासनगर पछवादून में खनन के खेल ने अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संरक्षित पर्यावरण क्षेत्रों की सुरक्षा पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। तहसील क्षेत्र अंतर्गत सभी मानकों की धज्जियां उड़ाते हुए ढालीपुर में एक खनन भंडारण ऐसा है चारों तरफ सेंसेटिव जोन प्रतिबंधित क्षेत्र है आसन झील के नजदीक यहां तक की आसन बैराज डैम क्षेत्र आसन वेटलैंड की परिधि में फिर भी न जाने किन मानकों के तहत उक्त भंडारण को स्वीकृति मिली हुई है।

जहां 6 अप्रैल 2026 को नेशनल बोर्ड फॉर वाइल्डलाइफ (NBWL) की स्थायी समिति ने उत्तराखंड में खनन पट्टों (Mining Leases) को लेकर कड़ा रुख अपनाते हुए ढालीपुर आसन वेटलैंड के पास आवंटित दो खनन पट्टों को निरस्त करने का आदेश पारित किया है। मिनिस्ट्री ऑफ एनवायरनमेंट, फॉरेस्ट एंड क्लाइमेट चेंज (MoEF&CC) ने उत्तराखंड के आसन कंजर्वेशन रिजर्व (Asan Conservation Reserve) के पास खनन पट्टों (Mining Leases) के प्रस्तावों को निरस्त (Reject) कर दिया था । यह निर्णय सुप्रीम कोर्ट के उस 28 अप्रैल 2023 सख्त आदेश के अनुपालन में लिया गया है, जिसमें संरक्षित क्षेत्रों (Protected Areas) के चारों ओर 1 किलोमीटर के दायरे में सभी प्रकार के खनन पर प्रतिबंध लगाया गया है।

ढालीपुर क्षेत्र में वाइल्डलाइफ बर्ड सैंक्चुअरी आसान झील से मात्र लगभग 100 मी की दूरी पर लगा रेत-बजरी का विशाल भंडार न केवल ‘उत्तराखंड स्टोन क्रशर नीति 2021’ की धज्जियां उड़ा रहा है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय महत्व वाली ‘आसन वेटलैंड’ (रामसर साइट) के अस्तित्व के लिए भी बड़ी चुनौती बना हुआ है।सवाल यह है कि जब मिनिस्ट्री ऑफ एनवायरनमेंट, फॉरेस्ट एंड क्लाइमेट चेंज ने 6 अप्रैल 2026 को एक सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट की 28 अप्रैल 2023 की रूलिंग को आधार मानते हुए दिए सख्त आदेश के बाद 1 किलोमीटर की परिधि में 2 खनन पट्टे निरस्त हो सकते हैं तो 1 किलोमीटर की परिधि के अंदर एक खनन भंडारण को जो कि सुप्रीम कोर्ट के सख्त आदेश और सरकार द्वारा खनन भंडारण के लिए निर्धारित किए गए अन्य सभी मानकों के विपरीत संचालित हो रहा है उक्त खनन भंडारण को खनन विभाग ने किस नियम व मानकों के तहत स्वीकृति दे दी है उक्त गंभीर प्रकरण संबंधित विभाग को सवालों के कटघरे में खड़ा करता है।

अंतरराष्ट्रीय नियमों और NGT के आदेशों के बावजूद, इस संवेदनशील जोन में भारी मशीनरी और डंपरों का संचालन पक्षियों के पारिस्थितिक तंत्र को प्रभावित कर रहा है।

हैरानी की बात है कि किस आधार पर संबंधित विभागों ने मानकों की अनदेखी कर यहां तक की माननीय सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों को दरकिनार करते हुए उक्त खनन भंडारण को NOC देकर पोर्टल खुलवाया गया है यह भी एक बड़ा गंभीर सवाल है? सूत्रों के माध्यम से ज्ञात हुआ है कि उक्त खनन भंडारण के संचालक के सरकार में बैठे खनन विभाग के एक बड़े अधिकारी से बड़े मधुर संबंध हैं या फिर बहुत ऊंची पहुंच जहां अधिकारियों ने नियम विरुध और मानकों के विपरीत काम कर रहे खनन भंडारण सभी सीज कर दिए गए हैं तो वहीं संबंधित विभाग ने सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों के विपरीत जाकर उक्त खनन भंडारण को स्वीकृति दी है।

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